सेवा कार्य
पूज्य बापू जी द्वारा किए गए समाज सेवा कार्य

पूज्य बापू जी ने 60 और 70 के दशक में जब दूर-दराज के गाँवों और आदिवासी इलाकों में जाना शुरू किया, तो उन्हें पता चला कि ईसाई मिशनरीज वहाँ की परिस्थितियों का लाभ उठाकर भोले-भाले हिन्दुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर रही हैं। पूज्य बापू जी ने ईसाई मिशनरीज के हर धर्मान्तरण के पैंतरे का तोड़ निकाला और उन्हें विफल करते रहे। नीचे उन 9 प्रमुख सेवा कार्यों का विस्तृत विवरण है जिन्होंने ईसाई मिशनरीज की नींद उड़ा दी।
भोजन, भजन और दक्षिणा
पूज्य बापू जी को जब ज्ञात हुआ कि ईसाई मिशनरीज "कुछ भोजन और धन का लालच" देकर भोले-भाले गरीब आदिवासी लोगों को ईसाई बना रही हैं तो पूज्य बापू जी ने उन सभी इलाकों में "भोजन, भजन और दक्षिणा" की योजना शुरू की।
इस योजना में हिन्दू आदिवासी लोगों को यह सुविधा दी गई कि वे संत आशारामजी आश्रम आएं, निशुल्क भोजन करें, फिर वैदिक और उस इलाके में प्रचलित भजन करें, उसके पश्चात कुछ धन दक्षिणा के रूप में आश्रम से लेकर जाएं - ताकि भोजन और धन के अभाव में कोई उन्हें ईसाई ना बना सके। इसके अलावा कोई अन्य समस्या हो तो पूज्य बापू जी तक पहुँचाई जाए।
पूज्य बापू जी हर एक सेवा का स्वयं निरीक्षण करते थे, जेल जाने से पहले।
जेल के बाद: पूज्य बापू जी को षडयंत्रपूर्वक जेल भेजकर ईसाई मिशनरीज को खुली छूट मिल गई। भोजन-भजन-दक्षिणा योजना लगभग बंद है और ईसाई धर्मान्तरण जोरों पर है।
गौशालाओं का निर्माण
पूज्य बापू जी गौ-हत्या के विरुद्ध हैं। उन्होंने हजारों गायों को गौ-तस्करों से छुड़ाया और पूरे भारतवर्ष में सैकड़ों गौशालाएँ खोलीं जहाँ पर हष्ट-पुष्ट गायें मिलती हैं। अभी हाल ही में सोशल-मीडिया पर वायरल हुआ रामू बैल भी पूज्य बापू जी की गौशाला का ही था।
जेल के बाद: गौशालाओं की देखरेख कमजोर हुई है। आश्रम मैनेजमेंट ने इस सेवा को उस स्तर पर नहीं किया जैसा पूज्य बापू जी करते थे।
निशुल्क आयुर्वेदिक दवाई सेवा
पूज्य बापू जी स्वयं आदिवासी इलाकों में जाते थे तो वहाँ उन्हें ईसाई धर्मान्तरण का नया पैंतरा पता चला।
विटामिन-सी का खेल:
ईसाई मिशनरियाँ आदिवासी इलाकों में निःशुल्क मेडिकल कैम्प लगाती थीं। कैम्प में आए लोगों को जो बीमारी होती उसकी दवाई ना देकर विटामिन-सी या कुछ अन्य दे देती और सबसे कहती कि "अपने सभी शक्तिशाली भगवानों का नाम लेकर दवाई खाना और दो दिन बाद आना।" जब दो दिन तक लोग ठीक नहीं होते और पुनः डॉक्टर के पास जाते, तब वे उन लोगों को उनकी बीमारी से सम्बन्धित सही दवाई देते और कहते - "तुम्हारे भगवान में दम नहीं है। अब भगवान ईसा मसीह यीशु का नाम लेकर दवाई खाना, पक्का ठीक हो जाओगे।" सही दवाई से वे ठीक हो जाते और फिर धीरे-धीरे उन्हें ईसाई बना दिया जाता।
पूज्य बापू जी ने इस पैंतरे का तोड़ निकाला - निःशुल्क आयुर्वेदिक दवाईयों का आदिवासी इलाकों में वितरण करके और "आरोग्य निधि" पुस्तक के माध्यम से आयुर्वेदिक नुस्खे जनमानस में प्रचलित करके। पूज्य बापू जी ने आम जन के लिए न्यूनतम मूल्य पर आयुर्वेदिक दवाईयाँ उपलब्ध करवाईं जिससे एलोपैथिक कम्पनियों को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने पूज्य बापू जी की कई दवाईयों पर कोर्ट केस कर दिए परन्तु परिणाम में दवाईयाँ शुद्ध साबित हुईं।
इसके अतिरिक्त पूज्य बापू जी ने साधकों को योग और ध्यान सिखाया - वैदिक तरीके से बिना दवाईयों के भी कैसे स्वस्थ रहा जाए।
जेल के बाद: जबसे पूज्य बापू जी को जेल भेजा है, दवाइयों की गुणवत्ता को कौन और क्यों खराब कर रहा है - यह विचारणीय तथ्य है। योग और वैदिक ज्ञान पहुँचाने का कार्य भी आश्रम मैनेजमेंट ने उस स्तर पर नहीं किया।
निशुल्क आवास योजना
पूज्य बापू जी स्वयं गाँव-गाँव जाकर आदिवासी इलाकों में निरीक्षण करते थे, फिर जरूरतमंद साधकों को योग वेदान्त सेवा समिति के माध्यम से आवास बनवाकर देते थे। बाढ़ प्रभावित, भूकम्प प्रभावित या किसी अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्र में जाकर बापू जी सभी राहत सामग्री प्रदान करते रहे। जिन साधकों के मकान इन आपदाओं में उजड़ जाते उन्हें नए आवास बनाकर दिए जाते थे।
पूज्य बापू जी किसी भी माध्यम या तरीके से होने वाले ईसाई धर्मान्तरण को रोकने में सक्षम रहे।
जेल के बाद: जबसे पूज्य बापू जी को षडयंत्रकारियों ने जेल भेजा है यह सभी कार्य लगभग बंद हैं और ईसाई मिशनरियों का धर्मान्तरण कार्य जोरों पर है।
रोजगार योजना
पूज्य बापू जी पुरुषार्थ करने में यकीन करते हैं। जब उनकी जानकारी में आया कि ईसाई मिशनरीज रोजगार का लालच देकर भी धर्मान्तरण करवाती हैं तो पूज्य बापू जी ने अपनी शरण में आए साधकों को लघु उद्योग खोलने में मदद शुरू की। इससे आदिवासी साधक स्वआश्रयी और स्वावलंबी बने और अपने आदिवासी भाइयों को भी रोजगार दें।
पूज्य बापू जी ने ईसाई धर्मान्तरण की यह योजना भी विफल कर दी।
जेल के बाद: जबसे पूज्य बापू जी को षडयंत्र से जेल भेजा है तबसे आश्रमों में एक अलग ही खेल चल रहा है।
गुरुकुल व्यवस्था
ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित स्कूलों में छोटे और भोले-भाले बच्चों के अवचेतन मन में सनातन धर्म के प्रति अविश्वास पैदा करके ईसा मसीह के प्रति विश्वास बढ़ाकर बच्चों को भविष्य का ईसाई बनाया जा रहा था।
स्कूल बस का किस्सा:
पूज्य बापू जी अपने सत्संगों में बताते थे - ईसाई स्कूल के बस कंडक्टर और ड्राइवर मिलकर बस को अचानक बंद करके मासूम बच्चों से कहते हैं कि "बस खराब हो गई है, अब सब अपने सबसे शक्तिशाली सनातनी भगवान से प्रार्थना करो कि बस को ठीक कर दे।" फिर वे बस के ना ठीक होने का नाटक करते हैं। फिर बच्चों से कहते हैं "चलो अब सबसे शक्तिशाली ईसा मसीह का नाम लेते हैं" - फिर ड्राइवर झट से बस स्टार्ट कर देता है। इससे बच्चों के अवचेतन मन में बैठ जाता है कि सबसे शक्तिशाली ईसा मसीह है। ऐसे ना जाने कितने दिमागी खेल रोज स्कूल में बच्चों के साथ खेले जाते हैं।
इन धर्मान्तरण के खतरनाक पैंतरों से निपटने के लिए पूज्य बापू जी ने वैदिक शिक्षाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ मिलाकर पढ़ाने के लिए गुरुकुल पद्धति वापस लाने के उद्देश्य से गुरुकुल खोले। गुरुकुल में काम करने वालों की आवश्यकता थी तो रोजगार के तहत लोगों को रोजगार भी मिला।
परन्तु इसी राह से बुरी तरह चिढ़ी ईसाई मिशनरियों ने अपने गुप्त ईसाई (एजेंट) गुरुकुल में भेज दिए - जिन्होंने भविष्य में पूज्य बापू जी के खिलाफ गहरे षडयंत्र किए।
जेल के बाद: गुरुकुलों की स्थिति बिगड़ी है। गुप्त ईसाई एजेंटों ने गुरुकुल व्यवस्था को कमजोर किया है।
धर्मान्तरित हुए लोगों की घर वापसी
पूज्य बापू जी ने काँची के शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी और अन्य राष्ट्र को समर्पित संतों के साथ मिलकर ईसाई धर्म में परिवर्तित हुए लोगों की घर वापसी के कार्यक्रम जोरों-शोरों से आरम्भ किए और लाखों-लाखों लोगों की घर वापसी करवाई।
जेल के बाद: घर वापसी कार्यक्रम पूरी तरह ठप हो गए हैं।
हिन्दुओं के सभी धर्म गुरुओं को एक मंच पर लाना
पूज्य बापू जी और शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी का यूँ एक साथ आना ईसाई मिशनरीज को रास नहीं आया। ईसाई मिशनरीज ने अपनी पाश्चात्य शक्तियों और गुप्त ईसाईयत के माध्यम से शंकराचार्य जी को 2004 में दीपावली की आधी रात गिरफ्तार करवा दिया।
पूज्य बापू जी ने पूरे भारत के सभी साधु-संतों, धर्म-गुरुओं को और हिन्दुत्ववादी लोगों को एक मंच पर लाकर आन्दोलन शुरू किया। पूरे भारत में पाश्चात्य शक्तियों से प्रभावित समाचार पत्रों और चैनलों के माध्यम से जो हिन्दुओं को बदनाम करने और "हिन्दू आतंकवाद" का नरेटिव गढ़ा जा रहा था उसे समाज से उखाड़ फेंका।
जेल के बाद: संतों की एकता का यह अभियान कमजोर पड़ा है, हालांकि हिन्दू महासंकल्प सभा इस कार्य को आगे बढ़ा रही है।
तुलसी पूजन और मातृ-पितृ पूजन दिवस
पूज्य बापू जी ने तुलसी पूजन (2014) और मातृ-पितृ पूजन दिवस (2006) - इन दो कार्यक्रमों को करने का आदेश दिया ताकि ईसाईयत को धूल चटा सकें। ये कार्यक्रम ईसाईयत को चुनौती देने और सनातन परम्परा को मजबूत करने के लिए शुरू किए गए।
जेल के बाद: गुप्त ईसाई एजेंटों ने इन कार्यक्रमों को किया तो, परन्तु उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए नहीं जैसा पूज्य बापू जी चाहते हैं। वे इन कार्यक्रमों से मात्र धन कमाते हैं - फिर उस धन का क्या करते हैं कोई हिसाब नहीं।
नारी शक्ति संगठन
बापू जी ने हमेशा ही अपने सत्संगों के माध्यम से नारी शक्ति को "नारी तू नारायणी" कहकर सम्बोधित किया। उन्होंने हमेशा सनातनी नारियों को सशक्त बनाने के लिए, नारी सशक्तिकरण और समाज में स्त्रियों की सुरक्षा से सम्बन्धित जो भी कार्य होने चाहिए थे वह सब हमेशा पुष्ट किए। बच्चियों और बेटियों को सशक्त बनाने के लिए अनेक कार्य किए।
नारी शक्ति संगठन भी इसीलिए बनाया गया है जिससे भारतभर की समस्त नारियाँ अपने आप को कमजोर या अबला न समझें बल्कि गार्गी, स्वयंप्रभा, मदालसा, अनसूया, सीता, सावित्री, द्रौपदी जैसे अपने आप को शक्ति का स्वरूप समझकर अपने कर्तव्य का हर क्षेत्र में निर्वाह करें।
इस संगठन का नेतृत्व अनीषा डांगे (शांभवी) पूज्य बापू जी की पावन प्रेरणा से कर रही हैं।
📞 +91 9867148328 — अनीषा डांगे (शांभवी)
मुख्य सहयोगी: किरण तिवारी (मुम्बई), भारती साळवे (नागपुर)
1993 - शिकागो धर्म संसद में वक्तव्य
सन् 1993 में स्वामी विवेकानंद जी के 100 वर्ष बाद पूज्य बापू जी ने शिकागो धर्म संसद में वक्तव्य दिया और संसार में कुछ धर्म विशेष और राष्ट्र विशेष द्वारा जो हिंसा की जा रही है उसकी निंदा की तथा भारतीय सनातन धर्म को दुनिया के सामने मजबूती से रखा। यह बात भी कुछ खास लोगों की आँखों में चुभ गई।