बापू का वीर

एक प्रत्यक्षदर्शी का बयान - राहुल जोशी

लेखक परिचय

पूज्य बापू जी के आशीर्वाद से आज मैं यह लिख रहा हूँ। पूज्य बापू जी के खिलाफ हुए घिनौने षड्यंत्र को मैंने बहुत करीब से देखा है। इस पृष्ठ में उस षड्यंत्र को उजागर करने का प्रयास किया है।

बचपन से बापू जी तक

मेरे दादा जी एक आध्यात्मिक व्यक्ति थे, उनका मुझे भरपूर सानिध्य प्राप्त हुआ, इसी वजह से मेरी अध्यात्म में रुचि बढ़ती गई। बाल्य अवस्था में सन् 1999 के दौरान मुझे पूज्य बापू जी के द्वारा संचालित 'बाल संस्कार केंद्र' में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

साथ ही मुझे नागपुर का होने की वजह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी अच्छी प्रशिक्षण प्राप्त हुई। पूज्य बापू जी के सत्संग प्रवचनों से मेरे अंतःकरण में सनातन और भारत की एकता और अखंडता के विचारों का प्रादुर्भाव हुआ; जिसे RSS की मुख्य शाखा नागपुर से जुड़े होने की वजह से और अधिक मजबूती मिली।

सन् 2007 में पूज्य बापू जी से पूर्णिमा महोत्सव में दीक्षा प्राप्त हुई।

बापू जी का धर्मांतरण विरोधी कार्य

आश्रम में सेवा के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि कैसे एकमात्र पूज्य बापू जी ऐसे संत थे जो उस समय, जब कोई सोशल मीडिया नहीं था, ईसाईयों द्वारा किए जाने वाले धर्मांतरण के कुकृत्यों को प्रखरता से उजागर करते थे।

पूज्य बापू जी मात्र बोलते नहीं थे बल्कि पूरी तत्परता से ईसाई मिशनरीज के खिलाफ काम करते थे और ईसाई मिशनरीज की गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा आदि राज्यों के आदिवासी इलाकों में कमर तोड़कर रख दी थी।

इसीलिए पूज्य बापू जी के खिलाफ नित नए षड्यंत्रों की रचना की जाती रही।

भोजन, भजन और दक्षिणा कार्यक्रम जिससे गरीब आदिवासी ईसाई मिशनरीज के लालच में न फँसें

गौशालाएँ जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो

निःशुल्क आयुर्वेदिक दवाइयाँ जिससे मिशनरी अस्पतालों का विकल्प मिले

गुरुकुल जिससे बच्चों को ईसाई स्कूलों में भेजने की जरूरत न पड़े

मीडिया का असली चेहरा

पूज्य बापू जी अपने सत्संगों और ऋषि प्रसाद पत्रिका के माध्यम से सन् 2000 से लगातार उपग्रह मीडिया की काली सच्चाई बता चुके थे। पूज्य बापू जी बताते थे कि यह मीडिया पाश्चात्य संस्कृति और ताकतों से चलती है जो भविष्य में सनातन और भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने का जब भी मौका आएगा तो अपनी अहम भूमिका निभाएगी।

इसका प्रमाण सन् 2008 और 2013 में हमने प्रत्यक्ष देखा। बिना सबूत, बिना जाँच, मीडिया ने पूज्य बापू जी को दोषी करार दे दिया। कोर्ट का फैसला आने से पहले ही मीडिया ट्रायल पूरा हो चुका था।

मैंने जो देखा - घटनाक्रम

28 अगस्त 2012: हेलीकॉप्टर दुर्घटना

28 अगस्त, 2012 को गोधरा, गुजरात में पूज्य बापू जी का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। परंतु उसकी कोई जाँच नहीं कराई गई। जबकि पूज्य बापू जी के खिलाफ लगातार षड्यंत्र हो रहे थे तो यह विचारणीय है - जाँच क्यों नहीं करवाई गई?

दिसंबर 2012: कल्कि काण्ड

दिसंबर 2012 में हमारे सामने एक और भयानक षड्यंत्र का खुलासा हुआ। षड्यंत्रकारियों ने कलयुग में अवतरित होने वाले कल्कि भगवान के अवतार का ही मजाक बना डाला। पूज्य बापू जी ने खुद फरवरी 2013 के सत्संग में सबके सामने इसका भंडाफोड़ किया और कानूनी कार्रवाई का आश्रम प्रबंधन को आदेश दिया। परंतु कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

अंदर से षड्यंत्र

सबसे दुखद बात यह थी कि षड्यंत्र बाहर से नहीं बल्कि अंदर से हो रहा था। वही लोग जिन पर बापू जी ने भरोसा किया, जिन्हें जिम्मेदारियाँ दीं, उन्होंने ही पीठ में छुरा घोंपा। गुप्त ईसाई एजेंटों ने आश्रम के प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया था।

अगस्त 2013: गिरफ्तारी

कल्कि काण्ड के बाद षड्यंत्रों की बाढ़ आ गई। कुछ विफल हो गए परंतु षड्यंत्रकारी 15 अगस्त, 2013 को अपने षड्यंत्र में सफल हो गए। ईसाई मिशनरीज ने असलियत में पूज्य बापू जी को जेल भेजा और लगातार बाहर नहीं आने दे रहीं।

मेरी लड़ाई जारी है

मैं उन षड्यंत्रकारियों से लगातार लड़ रहा हूँ। यह लड़ाई केवल पूज्य बापू जी की नहीं है, यह सनातन धर्म की लड़ाई है, भारत की एकता और अखंडता की लड़ाई है।

"मैं राहुल जोशी, पूज्य बापू जी का एक साधारण सेवक, इस सत्य का प्रत्यक्षदर्शी हूँ। और यह सत्य दुनिया के सामने आएगा।"