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राहुल जोशी - बापू का वीर: एक प्रत्यक्षदर्शी का बयान

1 अगस्त 2024राहुल जोशी
प्रत्यक्षदर्शीषड्यंत्रसत्यअनुभव

लेखक परिचय

पूज्य बापू जी के आशीर्वाद से आज मैं यह लिख रहा हूँ। पूज्य बापू जी के खिलाफ हुए घिनौने षड्यंत्र को मैंने बहुत करीब से देखा है। इस लेख में उस षड्यंत्र को उजागर करने का प्रयास किया है। उससे पहले मैं आपको अपना संक्षिप्त परिचय दे देता हूँ कि मुझे कैसे संत श्री आशाराम बापू जी का सानिध्य प्राप्त हुआ।

बचपन से बापू जी तक

मेरे दादा जी एक आध्यात्मिक व्यक्ति थे, उनका मुझे भरपूर सानिध्य प्राप्त हुआ, इसी वजह से मेरी अध्यात्म में रुचि बढ़ती गई। बाल्य अवस्था में सन् 1999 के दौरान मुझे पूज्य बापू जी के द्वारा संचालित 'बाल संस्कार केंद्र' में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

साथ ही साथ मुझे नागपुर का होने की वजह से 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' (RSS) से भी अच्छी प्रशिक्षण प्राप्त हुई। पूज्य बापू जी के सत्संग प्रवचनों से मेरे अंतःकरण में सनातन और भारत की एकता और अखंडता के विचारों का प्रादुर्भाव हुआ; जिसे RSS की मुख्य शाखा नागपुर से जुड़े होने की वजह से और अधिक मजबूती मिली।

सन् 2007 में पूज्य बापू जी से पूर्णिमा महोत्सव में दीक्षा प्राप्त हुई।

पूज्य बापू जी के सभी सेवा कार्य जो वे सनातन और भारत की एकता और अखंडता के लिए कर रहे थे, बहुत करीब से देखा और जाना।

आश्रम में सेवा और षड्यंत्रों की जानकारी

आश्रम में सेवा के दौरान सन् 2007 से पूर्व पूज्य बापू जी के साथ हुए कुछ षड्यंत्रों की भी जानकारी प्राप्त हुई।

यह जानकारी भी प्राप्त हुई कि कैसे एकमात्र पूज्य बापू जी ऐसे संत थे उस समय जब कोई सोशल मीडिया नहीं था, जो ईसाईयों द्वारा किए जाने वाले धर्मांतरण के कुकृत्यों को प्रखरता से उजागर करते थे।

पूज्य बापू जी मात्र बोलते नहीं थे बल्कि पूरी तत्परता से ईसाई मिशनरीज के खिलाफ काम करते थे और ईसाई मिशनरीज की गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा आदि राज्यों के आदिवासी इलाकों में कमर तोड़कर रख दी थी।

इसीलिए पूज्य बापू जी के खिलाफ नित नए षड्यंत्रों की रचना की जाती रही।

2011 से बापू जी के साथ यात्रा

सन् 2011 में मुझे पूज्य बापू जी के आशीर्वाद से, जब भी वे अलग-अलग जगह सत्संग या अन्य सेवा कार्य करने जाते तो उनके साथ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

पूज्य बापू जी अपने सत्संगों और ऋषि प्रसाद पत्रिका के माध्यम से सन् 2000 से लगातार उपग्रह मीडिया की काली सच्चाई बता चुके थे। पूज्य बापू जी बताते थे कि यह उपग्रह मीडिया पाश्चात्य संस्कृति और ताकतों से चलती है जो भविष्य में सनातन और भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने का जब भी मौका आएगा तो अपनी अहम भूमिका निभाएगी।

इसका कार्य सन् 2008 और 2013 में हम प्रत्यक्ष देख चुके हैं।

28 अगस्त 2012: हेलीकॉप्टर दुर्घटना

28 अगस्त, 2012 को गोधरा, गुजरात में पूज्य बापू जी का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

परंतु उसकी कोई जाँच नहीं कराई गई

जबकि पूज्य बापू जी के खिलाफ लगातार षड्यंत्र हो रहे थे तो यह एक विचारणीय तथ्य है - जाँच क्यों नहीं करवाई गई?

दिसंबर 2012: कल्कि काण्ड का खुलासा

फिर दिसंबर 2012 में ही हमारे सामने एक और भयानक षड्यंत्र का खुलासा हुआ। षड्यंत्रकारियों ने कलयुग में अवतरित होने वाले कल्कि भगवान के अवतार का ही मजाक बना डाला और उनका बहुत ही निरादर किया।

उस कल्कि काण्ड का पूज्य बापू जी ने खुद फरवरी 2013 के सत्संग में सबके सामने खुलासा किया और कानूनी कार्रवाई का आश्रम प्रबंधन को आदेश दिया।

परंतु कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

इसका उत्तर कल्कि काण्ड के विस्तृत विवरण में मिलता है।

षड्यंत्रों की बाढ़

कल्कि काण्ड के बाद तो जैसे षड्यंत्रों की बाढ़ ही आ गई। कुछ तो विफल हो गए परंतु षड्यंत्रकारी 15 अगस्त, 2013 को अपने षड्यंत्र में सफल हो गए।

मेरी लड़ाई

मैं उन षड्यंत्रकारियों से लगातार लड़ रहा हूँ। परंतु मैं षड्यंत्र का पहलू संपूर्ण समाज के सामने किसी भी मंच पर नहीं रख पाया।

षड्यंत्रकारी कितने ताकतवर हैं, समय-समय पर मेरे सामने जो खुलासे होते गए और अब ठीक से पता चला कि ईसाई मिशनरीज ने असलियत में कैसे पूज्य बापू जी को जेल भेजा और लगातार बाहर नहीं आने दे रहीं।

मेरा अनुभव: क्या देखा, क्या समझा

1. बापू जी का धर्मांतरण विरोधी कार्य

मैंने अपनी आँखों से देखा कि पूज्य बापू जी किस तरह आदिवासी क्षेत्रों में जाकर धर्मांतरण का विरोध करते थे। यह कोई केवल भाषण नहीं था, बल्कि जमीनी स्तर पर काम होता था:

  • भोजन, भजन और दक्षिणा कार्यक्रम जिससे गरीब आदिवासी ईसाई मिशनरीज के लालच में न फँसें
  • गौशालाएँ जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो
  • निःशुल्क आयुर्वेदिक दवाइयाँ जिससे मिशनरी अस्पतालों का विकल्प मिले
  • गुरुकुल जिससे बच्चों को ईसाई स्कूलों में भेजने की जरूरत न पड़े

2. मीडिया का असली चेहरा

पूज्य बापू जी सन् 2000 से ही कहते थे कि यह मीडिया पाश्चात्य ताकतों से चलती है। जब 2008 और 2013 में मीडिया ट्रायल हुआ तो उनकी बात सच साबित हुई।

बिना सबूत, बिना जाँच, मीडिया ने पूज्य बापू जी को दोषी करार दे दिया। कोर्ट का फैसला आने से पहले ही मीडिया ट्रायल पूरा हो चुका था।

3. आश्रम के अंदर से षड्यंत्र

सबसे दुखद बात यह थी कि षड्यंत्र बाहर से नहीं बल्कि अंदर से हो रहा था। वही लोग जिन पर बापू जी ने भरोसा किया, जिन्हें जिम्मेदारियाँ दीं, उन्होंने ही पीठ में छुरा घोंपा।

गुप्त ईसाई एजेंटों ने आश्रम के प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया था और धीरे-धीरे पूरे संगठन को अपने कंट्रोल में ले लिया।

षड्यंत्र की समयरेखा जो मैंने देखी

समयघटना
1999बाल संस्कार केंद्र से जुड़ाव
2007दीक्षा और आश्रम सेवा शुरू
2007 से पहलेपुराने षड्यंत्रों की जानकारी मिली
2011बापू जी के साथ यात्रा शुरू
अगस्त 2012हेलीकॉप्टर दुर्घटना, कोई जाँच नहीं
दिसंबर 2012कल्कि काण्ड का खुलासा
फरवरी 2013बापू जी द्वारा सत्संग में भंडाफोड़
अगस्त 2013झूठे आरोपों पर गिरफ्तारी

सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं

मैं आज भी लड़ रहा हूँ। यह लड़ाई केवल पूज्य बापू जी की नहीं है, यह सनातन धर्म की लड़ाई है, भारत की एकता और अखंडता की लड़ाई है।

जो लोग सत्य को दबाना चाहते हैं, वे भूल जाते हैं कि सत्य को कुछ समय के लिए छुपाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता।

मैं राहुल जोशी, पूज्य बापू जी का एक साधारण सेवक, इस सत्य का प्रत्यक्षदर्शी हूँ। और यह सत्य दुनिया के सामने आएगा।


यह लेख राहुल जोशी के प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित है।