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कल्कि काण्ड - पूरी कहानी: कैसे रचा गया भारत का सबसे बड़ा धार्मिक षड्यंत्र

1 मार्च 2024टीम
कल्कि काण्डषड्यंत्रठगी

कल्कि भगवान का जन्म! वो भी कुवारी कन्या के गर्भ से!

किसी भी बड़े षड्यंत्र के सफल होने से पूर्व, बहुत सारे छोटे-बड़े षडयंत्रों की एक श्रृंखला होती है। उन्हीं षडयंत्रों की श्रृंखला में से एक षडयंत्र रचा गया कलयुग में जन्म लेने वाले कल्कि भगवान के अवतार लेने का। यह षड्यंत्र इतना गहरा और सुनियोजित था कि 15-15 साल पुराने साधक भी इसके जाल में फँस गए।

पृष्ठभूमि: क्यों बने पूज्य बापू जी निशाना?

पूज्य संत श्री आशाराम बापू जी ईसाई मिशनरीज और धर्मान्तरण के विरुद्ध लगातार काम कर रहे थे। सन् 2004 में जब काँची के शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी को दीपावली की आधी रात गिरफ्तार किया गया, तो पूज्य बापू जी ने पूरे भारत के सभी सनातनियों को एक मंच पर ला दिया। कोर्ट में तो जेठमलानी जी ने शंकराचार्य जी का केस बहुत अच्छे से लड़ा और उन्हें निर्दोष साबित किया, और कोर्ट से बाहर का मोर्चा संभाला पूज्य बापू जी ने।

पूज्य बापू जी की इसी अद्वितीय शक्ति को देखते हुए ईसाई मिशनरीज और दुष्ट पाश्चात्य शक्तियों ने उनके आश्रम में लगातार गुप्त ईसाई एजेंट भेजने शुरू कर दिए। इनमें से दो सबसे खतरनाक खास प्रशिक्षण प्राप्त थे - एक को मनोविज्ञान और सम्मोहन (Hypnosis) में खास महारत प्राप्त थी।

एजेंट का आश्रम में प्रवेश और विश्वास जीतना

इस खास ईसाई एजेंट ने जब आश्रम में प्रवेश किया तो पहले दिन से ही इतनी सेवा-शुश्रूषा की कि सभी इससे अति शीघ्र प्रसन्न हो गए। मात्र कुछ माह के अन्दर यह व्यक्ति पूज्य बापू जी के खास सेवकों में शामिल हो गया।

जब इसने सबका अन्धा विश्वास जीत लिया, तब इसके असली खेल शुरू हुए।

टीम का निर्माण

सबसे पहले इसने उन लोगों की सूची बनाई जो पूज्य बापू जी के आश्रम से गलत आचरण, धोखाधड़ी या अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत निकाले गए थे और बदला लेने को उत्सुक थे। कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने सन् 1996-97 के दौरान आयुर्वेदिक दवाईयों के माध्यम से पूज्य बापू जी को धीमा जहर दिया था, जिससे उन्हें कई गम्भीर बीमारियाँ हुई थीं।

फिर इस खास ईसाई एजेंट ने इन सभी लोगों की एक टीम बनाई जो सभी षडयंत्रों को बाहर से क्रियान्वित करती थी।

आश्रम के भीतर कब्जा

इस एजेंट ने आश्रम के अन्दर सभी खास पदों पर बैठे लोगों को अलग-अलग माध्यम से अपने साथ मिलाया:

  • किसी को सम्मोहन से
  • किसी को धन से
  • किसी को अन्य अनैतिक माध्यम से

जो लोग पूज्य बापू जी के प्रति पूरी तरह से वफादार थे, उन्हें पूज्य बापू जी से झूठी फरियादें कर-करके या तो आश्रम से निकालवा दिया या उन्हें खास पदों से हटवा दिया।

इसके बाद सभी आश्रमों के मैनेजमेंट, गुरुकुलों के मैनेजमेंट - सब कुछ पूरी तरह से इस ईसाई एजेंट के हाथ में आ गया।

पूज्य बापू जी को अलग-थलग करना

यह एजेंट पूज्य बापू जी तक वही खबर पहुँचने देता जो यह चाहता। बाकी इसकी और टीम की मर्जी के बगैर कोई भी व्यक्ति पूज्य बापू जी से नहीं मिल सकता था। यह नियम आज सन् 2024 तक जोधपुर जेल में भी चालू है।

इस एजेंट ने पूज्य बापू जी को अपने ही परिवार से अलग कर दिया:

  • पूज्य बापू जी की सुपुत्री प्रेरणामूर्ति भारती श्री जी को
  • सुपुत्र नारायण साई जी को
  • पूजनीय मैया जी को भी

राजनीतिक शक्तियों से काटना

सन् 2009 में इस एजेंट ने षडयंत्र करके अहमदाबाद आश्रम में पुलिस द्वारा आम आश्रमवासियों को पिटवाकर पूज्य बापू जी और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के बीच दरार पैदा की। जब मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी स्वयं पूज्य बापू जी से मिलकर बात सुलझाने आए, तो इसने उन्हें भी षडयंत्र से मिलने नहीं दिया। इस तरह पूज्य बापू जी को राजनीतिक शक्तियों से भी काट दिया गया।

28 अगस्त 2012 - हेलीकॉप्टर दुर्घटना

सन् 2012 आते-आते पूज्य बापू जी के धर्मान्तरण विरोधी कार्य उच्चतम स्तर पर थे। ईसाई मिशनरीज और पाश्चात्य शक्तियों ने इन दो खास ईसाई एजेंटों (अर्जुन और रामा) पर दबाव बनाया कि वे अति शीघ्र बापू जी को रास्ते से हटाएँ।

28 अगस्त 2012 को पूज्य बापू जी का किराये पर लिया गया हेलीकॉप्टर गोधरा, गुजरात में बुरी तरह से दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पूज्य बापू जी और उनके साथ सभी लोग बचे।

हैरानी की बात:

  • उस हादसे की कोई जाँच नहीं की गई
  • सारी मीडिया ने उस दुर्घटना को 'चमत्कार' बता-बता कर खबर चलाई, जबकि जाँच की बात करनी चाहिए थी
  • आश्रम मैनेजमेंट ने साधकों को 'पूज्य बापू जी की लीला' कहकर मनोवैज्ञानिक तरीके से काबू किया, जाँच नहीं करवाई

हेलीकॉप्टर दुर्घटना का असली उद्देश्य था - पूज्य बापू जी को शारीरिक रूप से समाप्त करके उनके स्थान पर सीमा अहुजा की संतान को संस्था और साधकों का भगवान बनाना।

कल्कि अवतार की योजना

हेलीकॉप्टर दुर्घटना में विफल होने के बाद भी कल्कि भगवान के अवतार लेने की योजना जारी रही।

ओम प्रकाश प्रजापति जो उस समय छिन्दवाड़ा गुरुकुल का संचालक था (55 वर्ष, पहले से पत्नी और बच्चे) और सीमा अहुजा (25 वर्ष, अविवाहित) का प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों गोवा भी गए थे। जुलाई-अगस्त 2012 में इन दोनों के अनैतिक सम्बन्ध से सीमा अहुजा गर्भवती हो गई।

इन एजेंटों ने एक 'कल्कि अवतार समीति' बनाई और इस अवैध संतान को 'कल्कि भगवान का अवतार' घोषित करने की योजना बनाई।

7 दिसम्बर 2012 - पहली गोपनीय बैठक

'कल्कि अवतार समीति' ने अपनी पुरानी और नई जानकारी के अनुसार धनाढ्य साधकों की सूची बनाई। 6 दिसम्बर 2012 को सभी को फोन करके (रायपुर आश्रम के संचालक रजत के नाम से) बताया गया कि 7 दिसम्बर को रायपुर में एक अति आवश्यक गोपनीय बैठक है।

बैठक में काफी साधक उपस्थित थे। ओम प्रकाश प्रजापति और सीमा अहुजा कुछ लड़कियों के साथ वहाँ आए। सबसे पहले सीमा अहुजा और लड़कियों ने वहाँ उपस्थित सभी साधकों के फोन जमा करवा लिए।

मनोवैज्ञानिक खेल

फिर शुरू हुआ मनोवैज्ञानिक खेल:

  1. ओम प्रकाश प्रजापति ने सबको बताया कि पूज्य बापू जी की आज्ञा से वे दोनों यह सब बता रहे हैं
  2. कहा गया कि सीमा अहुजा को जो संतान होगी वह कल्कि भगवान का अवतार होगी
  3. चूँकि कलयुग का अवतार है इसलिए कुवारी कन्या के गर्भ से जन्म लेगा
  4. यह संतान पृथ्वी से पाप खत्म करके राज करेगी और पूज्य बापू जी की संस्था का उत्तराधिकारी होगी

इन गुप्त ईसाईयों द्वारा हमारे भगवान का इतना बड़ा अपमान किया गया ताकि भविष्य में यह इसकी तुलना कुवारी मरियम के गर्भ से जन्म लेने वाले यीशु मसीह से कर सकें!

फर्जी संदेश की चाल

ओम प्रकाश प्रजापति अपने दोनो हाथ ऊपर हवा में फैलाता और सभी को ऐसे दर्शाता जैसे ध्यान मुद्रा में पूज्य बापू जी से सीधी बात हो रही हो। फिर कहता - "पूज्य बापू जी, अगर आप इन सभी को कल्कि भगवान परिवार में शामिल करना चाहते हैं तो मेरे फोन पर मैसेज भेजें।"

फिर वह अपना फोन हवा में लहराता, फोन में मैसेज की आवाज आती, और वह सबको पूज्य बापू जी का मैसेज दिखाता - जिसमें 'हाँ' लिखा होता और नीचे 'पूज्य बापू जी'। वास्तव में यह मैसेज उसके ही गुर्गे ने पर्दे के पीछे से भेजा होता था।

कल्कि भगवान परिवार के नियम, शर्तें और शपथ

  1. गोपनीयता: इन बैठकों (छिन्दवाड़ा, रायपुर, जबलपुर, झारखण्ड आदि) को गुप्त रखना, किसी को उजागर नहीं करना
  2. धन सेवा: सीमा अहुजा की संतान जिसका नाम 'ओम' होगा, सभी को उसकी तन, मन और विशेषकर धन से अधिक से अधिक सेवा करनी है
  3. सीमा अहुजा की पूजा: वह सभी के लिए पूजनीय है, सभी उसकी सेवा करेंगे
  4. आत्म साक्षात्कार का लालच: कल्कि भगवान परिवार में शामिल लोगों को पूज्य बापू जी आत्म साक्षात्कार कराएंगे - पहले 108 की संख्या रखी, फिर धन बटोरते हुए 216 कर दी। 300-350 लोगों से करोड़ों की ठगी की गई।
  5. पूज्य बापू जी से छुपाना: शपथ दिलाई जाती कि पूज्य बापू जी के सामने से पूछने पर भी न बताएं। कहा जाता - "वे अवश्य लीला करेंगे"
  6. धन वर्षा का लालच: जो नियमों का पालन करेगा, उसके घर में धन की वर्षा होगी
  7. भय: जो गोपनीयता भंग करेगा उसके परिवार पर भयंकर मुसीबतें आएंगी

गोदभराई और धन उगाही

बैठकों के बाद सीमा अहुजा की अलग-अलग स्थानों पर गोदभराई की रस्में कराई गईं। एक रस्म 10 दिसम्बर 2012 को छिन्दवाड़ा में हुई। इन रस्मों में सीमा अहुजा को देवी की तरह पूजा जाता और साधकों से हजारों और लाखों के उपहार लिए जाते।

इस तरह इन षडयंत्रकारियों ने 15-15 साल पुराने साधकों से भी पैसे ठगकर करोड़ों की उगाही कर ली।

कल्कि अवतार समीति के सदस्य

आश्रम से निकाले गए लोगों में से:

  • राजू चंडाक उर्फ राजू लम्बू
  • कौशिक पटेल
  • अमृत प्रजापति (धीमा जहर देने वाला)
  • दिनेश भागचंदानी
  • शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश के श्री योग वेदान्त समीति के तत्कालीन अध्यक्ष कर्मवीर - अपनी पत्नी सुनीता और पूरे परिवार सहित

एक चौंकाने वाला तथ्य

सीमा अहुजा का कर्मवीर की बेटी से खास लगाव था और उनके घनिष्ठ सम्बन्ध रहे हैं। वह लड़की हर समय सीमा अहुजा के इर्द-गिर्द रहती थी। यही कर्मवीर उसी लड़की का पिता है जिसने पूज्य बापू जी पर जोधपुर में तथाकथित आरोप लगाया! इस लड़की और इसके पूरे परिवार का कल्कि अवतार षड्यंत्र में शामिल होना पूरा हैरान करने वाला तथ्य है।

भंडाफोड़: 2-3 फरवरी 2013

कुछ साधकों को इन सब पर शक हो गया। वे पूज्य नारायण सांई जी को शिकायत करते हैं, क्योंकि पंकज मीरचंदानी (गुप्त ईसाई) के कारण सीधे पूज्य बापू जी से मिलना सम्भव नहीं था।

पूज्य नारायण सांई जी ने पंकज मीरचंदानी के गुर्गों की अनुपस्थिति का लाभ उठाकर पूज्य बापू जी को एकांत में कल्कि अवतार के नाम पर हो रही ठगी के बारे में बताया।

पूज्य बापू जी ने स्वयं जाँच की और सभी को दोषी पाया। उन्होंने सभी दस्तावेजों को इकट्ठा करके आश्रम मैनेजमेंट से 36 ठगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा। जाँच में एक और बात पता चली - शीघ्र ही इससे भी बड़ा षडयंत्र पूज्य बापू जी के विरुद्ध होने वाला था। इनका उद्देश्य पूज्य बापू जी के साथ नारायण साई जी को भी समाप्त करना था।

2-3 फरवरी 2013 के सत्संग में पूज्य बापू जी ने सभी के सामने कल्कि भगवान के अवतार के नाम पर हो रही ठगी का भाँडा फोड़ दिया।

सबूत नष्ट करने की कोशिश

पूज्य बापू जी आश्रम मैनेजमेंट की कार्रवाही का इंतजार करते रहे। इतने में:

  • ओम प्रकाश प्रजापति और अन्य सभी अपराधी सबूत के दस्तावेजों को नष्ट करने लगे
  • छिन्दवाड़ा गुरुकुल के रजिस्टरों को गायब किया गया
  • रजिस्टरों से छेड़छाड़ करके आरोप लगाने वाली लड़की का नाम 2008 के सातवीं कक्षा के रजिस्टर में चालाकी से लिखा गया - गुरुकुल रजिस्टरों में आज भी उस लड़की का नाम ठीक से दर्ज नहीं मिलता

कल्कि "भगवान" का जन्म

इनके तथाकथित कल्कि भगवान का जन्म अप्रैल 2013 में एक कन्या के रूप में हुआ (गर्भधारण के 10वें महीने), जो पूज्य बापू जी ने हरिद्वार के सत्संग में बताया था।

उसी हरिद्वार सत्संग में वही तथाकथित लड़की पूज्य बापू जी के विरुद्ध जोधपुर जैसा षड्यंत्र करने का प्रयास करती है, परन्तु विफल रहती है। फिर मात्र चार महीनों बाद जोधपुर में यह षड्यंत्र सफल होता है।

षड्यंत्र का परिणाम

  • 31 अगस्त 2013 को पूज्य बापू जी को गिरफ्तार किया गया - 28 अगस्त 2012 की हेलीकॉप्टर दुर्घटना से मात्र एक साल का अंतर
  • आश्रम मैनेजमेंट ने कल्कि अवतार वाले एक भी अपराधी पर कार्रवाही नहीं की
  • पंकज मीरचंदानी ने अपने सारे गुप्त ईसाई परिवार को बचा लिया
  • सीमा अहुजा का होशंगाबाद में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स है और वह आज भी देवी की तरह पूजी जा रही है

आज तक का सच (2025)

  • कल्कि अवतार के नाम पर ठगी आज भी गुप्त तरीके से जारी है
  • कल्कि काण्ड के एक भी अपराधी को आज 2025 तक कोई सजा नहीं हुई
  • जबसे इन गुप्त ईसाईयों ने पूज्य बापू जी को जेल भेजा है, उनकी संस्था के माध्यम से जो धर्मान्तरण विरोधी कार्य होते थे वे बंद हो चुके हैं
  • अब धर्मान्तरण विरोध के नाम पर मात्र भंडारे होते हैं - वे भी धनाढ्य साधकों से मोटी रकम वसूलने के उद्देश्य से
  • गुप्त ईसाई एजेंटों ने सभी आश्रम पदों पर और आश्रम के समस्त धन पर कब्जा कर लिया है

सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।