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कल्कि काण्ड का सच - पर्दाफाश: 300-350 साधकों से करोड़ों की ठगी

10 फ़रवरी 2024टीम
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कल्कि काण्ड: भारत के सबसे बड़े धार्मिक षड्यंत्रों में से एक

कल्कि काण्ड इतिहास के सबसे बड़े और सबसे कुटिल धार्मिक षड्यंत्रों में से एक है। इसमें गुप्त ईसाई एजेंटों ने हिन्दू धर्म की पवित्र मान्यताओं - कल्कि भगवान के अवतार की भविष्यवाणी - का दुरुपयोग करके सैकड़ों साधकों की श्रद्धा और धन दोनों लूटा। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन्होंने इस ठगी का भंडाफोड़ किया - पूज्य बापू जी - उन्हें ही इन षड्यंत्रकारियों ने जेल पहुँचा दिया।

षड्यंत्र की नींव: ओम प्रकाश प्रजापति और सीमा अहुजा

ओम प्रकाश प्रजापति

ओम प्रकाश प्रजापति छिन्दवाड़ा गुरुकुल का संचालक था। 55 वर्ष का, पहले से विवाहित और बच्चों वाला यह व्यक्ति गुप्त ईसाई एजेंटों के नेटवर्क का हिस्सा था। पूज्य बापू जी जो धन सेवा कार्यों के लिए भेजते थे, उसमें से ये अपनी अय्याशियों पर खर्च करते थे।

सीमा अहुजा

मात्र 25 वर्ष की अविवाहित सीमा अहुजा महिला वर्ग की संचालक थी। ओम प्रकाश प्रजापति के साथ उसका अनैतिक सम्बन्ध था। दोनों गोवा भी गए थे। जुलाई-अगस्त 2012 में इन दोनों के सम्बन्ध से सीमा अहुजा गर्भवती हो गई।

षड्यंत्र का जन्म

इस अनैतिक गर्भ को छुपाने और उसका राजनीतिक-धार्मिक फायदा उठाने के लिए एक शातिर योजना बनाई गई - इस संतान को "कलयुग में जन्म लेने वाले कल्कि भगवान का अवतार" घोषित करना।

'कल्कि अवतार समीति' का गठन

गुप्त ईसाई एजेंटों ने आश्रम से निकाले गए उपद्रवी तत्वों के साथ मिलकर एक 'कल्कि अवतार समीति' बनाई। इसमें शामिल थे:

  • राजू चंडाक उर्फ राजू लम्बू - आश्रम से निष्कासित
  • कौशिक पटेल - आश्रम से निष्कासित
  • अमृत प्रजापति - वही व्यक्ति जिसने 1996-97 में पूज्य बापू जी को आयुर्वेदिक दवाईयों के माध्यम से धीमा जहर दिया था
  • दिनेश भागचंदानी - आश्रम से निष्कासित
  • कर्मवीर (शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश) - श्री योग वेदान्त समीति के तत्कालीन अध्यक्ष, अपनी पत्नी सुनीता और पूरे परिवार सहित

गोपनीय बैठकों की कार्यप्रणाली

बैठक बुलाने का तरीका

धनाढ्य साधकों की सूची बनाकर उन्हें फोन पर बुलाया जाता था। 6 दिसम्बर 2012 को रायपुर आश्रम के संचालक रजत के नाम से फोन करके 7 दिसम्बर को रायपुर में गोपनीय बैठक बुलाई गई।

बैठक की शुरुआत

  • ओम प्रकाश प्रजापति और सीमा अहुजा कुछ लड़कियों के साथ आते
  • सबसे पहले सभी के मोबाइल फोन जमा करवा लिए जाते
  • फिर शुरू होता मनोवैज्ञानिक खेल

मनोवैज्ञानिक नियंत्रण की तकनीक

पहला कदम: ओम प्रकाश प्रजापति सबको बताता कि यह सब "पूज्य बापू जी की आज्ञा" से हो रहा है। पूज्य बापू जी का नाम लेकर सभी की श्रद्धा का दुरुपयोग किया जाता।

दूसरा कदम: घोषणा की जाती कि सीमा अहुजा की संतान कल्कि भगवान का अवतार होगी। चूँकि कलयुग में जन्म होगा, इसलिए कुवारी कन्या के गर्भ से जन्म लेगा। यह हिन्दू भावनाओं का घोर अपमान था - गुप्त ईसाईयों ने यह कहानी ईसाई धर्म की वर्जिन मैरी से प्रेरित होकर गढ़ी थी।

तीसरा कदम: "लाइव संपर्क" का नाटक - ओम प्रकाश दोनों हाथ ऊपर फैलाकर ध्यान मुद्रा का नाटक करता, फिर कहता "पूज्य बापू जी अगर आप सहमत हैं तो मेरे फोन पर मैसेज भेजें।" फोन हवा में लहराता, मैसेज की आवाज आती, और पर्दे के पीछे से उसके ही गुर्गे द्वारा भेजा गया "हाँ - पूज्य बापू जी" का फर्जी मैसेज दिखाया जाता।

शपथ और धमकी

  • गोपनीयता की शपथ - किसी को नहीं बताना
  • पूज्य बापू जी से भी नहीं बताना - "वे लीला करेंगे"
  • जो गोपनीयता भंग करेगा उसके परिवार पर भयंकर मुसीबतें आएंगी

ठगी का पैमाना

गोदभराई समारोह

बैठकों के बाद सीमा अहुजा की गोदभराई अलग-अलग स्थानों पर कराई गई:

  • 10 दिसम्बर 2012 को छिन्दवाड़ा में
  • अन्य स्थानों पर भी अलग-अलग साधकों के मध्य

इन रस्मों में सीमा अहुजा को देवी की तरह पूजा जाता और हजारों-लाखों के उपहार लिए जाते।

कुल ठगी

  • 300-350 साधकों को ठगा गया
  • करोड़ों रुपये की उगाही हुई
  • 15-15 साल पुराने साधकों से भी पैसे ठगे गए
  • प्रारम्भ में 108 लोगों को आत्म साक्षात्कार का लालच दिया, फिर 216 कर दिया - यानी ज्यादा पैसे बटोरने के लिए संख्या बढ़ाई गई

आरोप लगाने वाली लड़की का कल्कि काण्ड से सम्बन्ध

यह सबसे चौंकाने वाला तथ्य है जिसे मुख्यधारा मीडिया ने पूरी तरह दबाया:

सीमा अहुजा का कर्मवीर की बेटी से बहुत खास और घनिष्ठ सम्बन्ध था। वह लड़की हर समय सीमा अहुजा के इर्द-गिर्द रहती थी। और यही कर्मवीर उसी लड़की का पिता है जिसने पूज्य बापू जी पर जोधपुर में आरोप लगाया।

कर्मवीर अपनी पत्नी सुनीता और पूरे परिवार सहित कल्कि अवतार समीति में शामिल था। आरोप लगाने वाली लड़की और उसके पूरे परिवार का इस षड्यंत्र में शामिल होना पूरा हैरान करने वाला वाक्या है।

पूज्य बापू जी द्वारा भंडाफोड़

जानकारी कैसे मिली

कुछ सतर्क साधकों को शक हुआ और उन्होंने पूज्य नारायण सांई जी को शिकायत की (क्योंकि पंकज मीरचंदानी के कारण सीधे पूज्य बापू जी से मिलना सम्भव नहीं था)।

जाँच

पूज्य नारायण सांई जी ने अवसर मिलने पर पूज्य बापू जी को एकांत में बताया। पूज्य बापू जी ने स्वयं जाँच की, सभी दस्तावेज इकट्ठे किए, और सभी 36 ठगों को दोषी पाया।

2-3 फरवरी 2013: सत्संग में भंडाफोड़

पूज्य बापू जी ने 2-3 फरवरी 2013 के सत्संग में सभी के सामने कल्कि भगवान के अवतार के नाम पर हो रही ठगी का भंडाफोड़ कर दिया। उन्होंने आश्रम मैनेजमेंट से 36 ठगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया।

एक और बड़ा खुलासा

जाँच में यह भी पता चला कि शीघ्र ही इससे भी बड़ा षड्यंत्र पूज्य बापू जी और नारायण साई जी के विरुद्ध होने वाला था।

भंडाफोड़ के बाद

सबूत नष्ट

ओम प्रकाश प्रजापति और अन्य अपराधियों ने:

  • सबूत के दस्तावेज नष्ट किए
  • छिन्दवाड़ा गुरुकुल के रजिस्टर गायब किए
  • रजिस्टरों में छेड़छाड़ करके आरोप लगाने वाली लड़की का नाम 2008 के रजिस्टर में लिखा

आश्रम मैनेजमेंट की विफलता

आश्रम मैनेजमेंट ने कल्कि अवतार वाले एक भी अपराधी पर कार्रवाही नहीं की। इसके बजाय, पूज्य बापू जी को ही जेल पहुँचा दिया गया।

अप्रैल 2013: कल्कि "अवतार" का जन्म

सीमा अहुजा की संतान अप्रैल 2013 में पैदा हुई - एक कन्या, लड़का नहीं। कल्कि अवतार की सारी भविष्यवाणी झूठी साबित हुई।

आज की स्थिति (2025)

  • कल्कि अवतार के नाम पर ठगी आज भी गुप्त तरीके से जारी है
  • सीमा अहुजा का होशंगाबाद में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स है
  • वह आज भी देवी की तरह पूजी जा रही है
  • 2025 तक कल्कि काण्ड के एक भी अपराधी को कोई सजा नहीं हुई
  • पंकज मीरचंदानी ने अपने पूरे गुप्त ईसाई नेटवर्क को बचा लिया

प्रश्न जो उत्तर माँगते हैं

  1. आरोप लगाने वाली लड़की के परिवार का कल्कि काण्ड में शामिल होना - क्या यह महज संयोग है?
  2. 28 अगस्त 2012 (हेलीकॉप्टर दुर्घटना) से 31 अगस्त 2013 (गिरफ्तारी) - मात्र एक साल का अंतर - क्या यह संयोग है?
  3. गुरुकुल रजिस्टरों में हेरफेर क्यों किया गया?
  4. हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जाँच क्यों नहीं हुई?
  5. कल्कि काण्ड के किसी भी अपराधी को सजा क्यों नहीं हुई?
  6. आश्रम मैनेजमेंट ने कार्रवाही क्यों नहीं की?

ये प्रश्न सत्य की ओर इशारा करते हैं। कल्कि काण्ड पूज्य बापू जी के खिलाफ रचे गए व्यापक षड्यंत्र की एक कड़ी है।

सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।