
पूज्य संत श्री आशाराम बापू जी
एक संत जिन्होंने करोड़ों लोगों का जीवन बदला
गुरु परम्परा
श्री रामानंद जी द्वारा स्थापित दादू दयाल वैष्णव संप्रदाय

आदि शंकराचार्य

स्वामी दयानंद
संत दादू दयाल जी
संत निश्चल दास जी
महर्षि केशवराम जी
सांई लीला शाह जी महाराज
संत श्री आशाराम बापू जी
संत कभी मरते नहीं हैं, वे हमेशा समाज के भले के लिए कार्य करते हैं और अपने विचारों से हमेशा समाज में रहते हैं। जो सभी संतों ने किया और समाज का भला करने की परम्परा को ही पूज्य बापू जी ने आगे बढ़ाया।
गुरु परिवार
पूज्य बापू जी के पावन परिवार का परिचय

एक में सब... सब में एक... हमारा प्यारा गुरु परिवार

पूजनीय जगत जननी माँ (मैया जी)
मैया जी बाल्यकाल से ही अत्यंत निर्मल, करुणा, ममता, साहनशीलता, गंभीरता, प्रेम, उदारता, लज्जाशीलता, सब के प्रति दयाभाव आदि दैवी गुण प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर होने लगे।
विवाह उपरांत उन्होंने अपने पति परमेश्वर की इच्छा में अपनी इच्छा मिला दी। उन्होंने अपने पति परमेश्वर की हर ईश्वर प्राप्ति की इच्छा पूरी करने पर मैया ने दुर्दांतपूर्वक कहा — "जो आपका मार्ग है, वही मेरा है! मैं आपकी साधना में कभी भी विघ्नरूप नहीं बनूँगी।"
इस महान नारायणी रूपी नारी ने अपने पतिदेव को सहर्ष विदाई दी और उनके पदचिन्हों पर चलते हुए, सादगी और संयमपूर्वक ईश्वर की ओर अग्रसर होने का दृढ़ संकल्प किया। उन्होंने बापू जी के इस विरह को साधना बना लिया।
तत्पश्चात पूज्य स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज के आशीर्वाद से पूज्य गुरु परिवार में दो महायोगियों का अवतरण हुआ।
विश्व वंदनीय हमारी पूजनीय जगत जननी मैयाजी की हम क्या स्तुति करें, क्या उनकी महिमा को वर्णन करें — क्योंकि उन्होंने जो दैवी कार्य किए, उन्होंने जो सहनशीलता, समता की साक्षात प्रतिमा स्थापित की, जिन्होंने पूज्य बापूजी के हर दैवी कार्य में इमारत की नींव के नाईं पूज्य बापूजी का साथ दिया है। ऐसे विरले महापुरुष जिनको मान सम्मान की भी चाह नहीं।
"इमारत की नींव को कोई नहीं देखता" — "सभी यश और लेते.. सहती शीला"

पूज्य नारायण प्रेम साईं जी
पूर्व योगी पूज्य नारायण साईं जी ने अपने परमकल्याण का अधूरा कार्य पूरा करने के लिए ब्रह्मनिष्ठ गुरु पूज्य बापू जी के यहाँ जनवरी 1973 को अहमदाबाद में अवतरण लिया। 5 वर्ष की आयु में ही साईं जी ने अपनी माताश्री को छोड़कर अपने पिताश्री पूज्य बापू जी के साथ आश्रम में रहना आरम्भ किया।
गुरुदेव की छत्रछाया में अनेक साधना, अनुष्ठान कर के, लौकिक तथा पारलौकिक जीवन में कड़ी कसौटियों को पार कर अपने अंतिम पड़ाव आत्मसाक्षात्कार की ओर अग्रसर हुए।
षड्यंत्र: जब पूज्य बापू जी को कारावास हुआ तब नारायण साईं जी ने पूज्य बापू जी के शीघ्र रिहाई हेतु स्वयं कार्य करना आरम्भ किया। परन्तु देशद्रोही राजनेताओं ने मिलकर लड़कियों (पूर्व संचालिका) के ज़रिये 12 साल पुरानी घटना बताते हुए नारायण साईं जी को बिना किसी सबूत के बलात्कार के झूठे आरोप में सूरत जेल में कैद करवा दिया।

प्रेरणामूर्ति भारती श्री जी (बापू जी की सुपुत्री)
पूज्य भारती श्री जी का अवतरण 15 दिसम्बर 1974 को ब्रह्मनिष्ठ गुरु पूज्य बापू जी के यहाँ हुआ। बचपन से ही श्री जी प्राणायाम, भगवत भक्ति में दृढ़ निश्चयी रहीं। पूज्य बापू जी के कठोर नियम, अनुशासन और मैया श्रीलक्ष्मी देवी की छत्रछाया में अपने बचपन को सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक बचपन बनाया।
परमात्मा प्राप्ति के मार्ग पर उन्होंने जीवन में बहुत से कठिनाइयों को, पीड़ा एवं दुःखद परिस्थितियों को पैरों तले कुचल दिया तथा समतामयी मैया जी की क्षत्रछाया में एवं अपने गुरु परम पूज्य बापू जी की परम अहेतुकी कृपा से अपने परम लक्ष्य ब्रह्मानंद को पा लिया।
षड्यंत्र: आश्रम में समर्पित कुछ दुष्ट, लोभी और ईर्ष्यावान नारियों, जैसे कि नीता वैद्य, संचालिका और इनके कुछ अनुयायियों ने अनेक षड्यंत्र रचकर मैया जी को महिला आश्रम से बाहर निकालने के लिए प्रयास किए। इन्होंने हर बार पूज्य बापू जी की झूठी शिकायतें कर पूज्य बापू जी, मैया जी और भारती श्री जी में अनबन उत्पन्न करने की कोशिश की। गुरु परिवार को अलग करना पड़ा ताकि वे बाधक लड़ाई-झगड़ा छोड़ साधना में ध्यान दे सकें।
27 जुलाई 2018 — भारती श्री जी का ऐतिहासिक वक्तव्य:
"जोधपुर के केस को लेकर क्यूँ इतनी कहानियाँ बनाई जाती हैं? क्यों इतने साधकों को गुमराह किया जाता है? प्रभुजी के सत्संग में नहीं जाना चाहिए, क्यूँ नहीं जाना चाहिए? तो बापूजी मना करते हैं, सत्संग में नहीं जाना चाहिए, ऐसा आपको आश्रम के लोग कहते हैं... आश्रम के सत्ता संभाले के बैठे हो, इन पाँच सालों में ये आप का कर्तव्य नहीं बनता कि मैया जी के पास आकर उनका हाल-चाल लिया और दिया जाए?"
सतप्रेरणा ट्रस्ट — पूज्य श्री जी द्वारा संचालित ट्रस्ट
प्रारम्भिक जीवन

युवा पूज्य बापू जी
पूज्य बापू जी अपने बाल्य काल से ही आध्यात्म में गहन रुचि रखते थे। किशोर अवस्था में ही विवाहित होते हुए भी पूज्य साई लीला शाह जी के आशीर्वाद से कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए खूब शास्त्र अध्ययन किया और आत्म साक्षात्कार किया।
60 और 70 के दशक में उन्होंने समाज उत्थान के लिए कार्य शुरू किए। दूर-दराज के गाँवों और आदिवासी इलाकों में जाकर वहाँ के लोगों की जैसी समस्या होती थी उसके अनुसार उनकी मदद करते थे। जब बापू जी ने यह सब शुरू किया तो उनके सामने आया कि ईसाई मिशनरीज भारत के दूर-दराज और आदिवासी इलाकों में भोले-भाले हिन्दुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का भयानक खेल खेल रही हैं। 60 और 70 के दशक में किसी को भी भान नहीं था कि ईसाई मिशनरीज यह खेल खेल रही हैं।
पूज्य बापू जी ने उसी समय से ईसाई मिशनरीज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और हिन्दू समाज को सनातन से जोड़े रखने के लिए और भारत की एकता और अखण्डता बचाने के लिए सेवा कार्य शुरू किए।
मिशन और सेवा

हमारे ग्रन्थों, दर्शनों, उपनिषदों आदि पुस्तकों में जो ज्ञान है उसे पूज्य बापू जी ने सत्संगों और निम्नतम शुल्क की पुस्तकों के माध्यम से साधारण से साधारण मनुष्य तक पहुँचाया। भारत समाज में जो भी गंदगी या कुरीति 800 साल की गुलामी और ईसाईयत की काली छाया के कारण फैली उसे पूज्य साई लीला शाह जी की आज्ञा से समाज से साफ करने का कार्य पूज्य बापू जी पूरी तत्परता से करते आए हैं।
पूज्य बापू जी बहुत तटस्थता और कठोरता से भारत और सनातन विरोधी तत्त्वों का सामना करते थे। वे अतुलनीय ताकत से सनातन को एक करने का कार्य कर रहे थे। उनकी समाज सेवाओं और शुद्ध संकल्पों का वर्णन करने के लिए शब्द भी कम पड़ जाएंगे।
प्रमुख उपलब्धियाँ
1993 - शिकागो धर्म संसद
सन् 1993 में स्वामी विवेकानंद जी के 100 वर्ष बाद पूज्य संत श्री आशाराम बापू जी ने शिकागो धर्म संसद अमेरिका में वक्तव्य दिया। पूज्य बापू जी ने संसार में कुछ धर्म विशेष और राष्ट्र विशेष द्वारा जो हिंसा की जा रही है उसकी निंदा की तथा भारतीय सनातन धर्म को दुनिया के सामने मजबूती से रखा। यह बात कुछ खास लोगों की आँखों में चुभ गई।
2004 - शंकराचार्य जी की रक्षा और संतों को एक मंच पर लाना
काँची के शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी को सन् 2004 की दीपावली की आधी रात को एक हत्या के आरोप में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। हिन्दू धर्म के चार प्रमुख मठों में से एक काँची के शंकराचार्य जी के साथ दक्षिण के पूरे ईसाई सिस्टम ने बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया।
कोर्ट में जेठमलानी जी ने केस लड़ा और निर्दोष साबित किया। कोर्ट से बाहर का मोर्चा संभाला पूज्य बापू जी ने - उन्होंने पूरे भारत के सभी साधु-संतों, धर्म-गुरुओं को और हिन्दुत्ववादी लोगों को एक मंच पर लाकर आन्दोलन शुरू किया। पाश्चात्य शक्तियों से प्रभावित मीडिया द्वारा जो "हिन्दू आतंकवाद" का नरेटिव गढ़ा जा रहा था उसे समाज से उखाड़ फेंका।
2012 - धर्म संसद के अध्यक्ष
सभी कार्यों को देखते हुए और उनके ज्ञान के कारण, सन् 2012 में सभी संतों के द्वारा एकमत से पूज्य बापू जी को धर्म संसद का अध्यक्ष चुना गया और आगे की रणनीति बनाई गई। यह पूज्य बापू जी के धर्मान्तरण विरोधी कार्यों का उच्चतम स्तर था।
आश्रम नेटवर्क
आश्रम
गुरुकुल
गौशालाएं
अनुयायी
पूज्य बापू जी ने पूरे भारत और विश्व में 400 से अधिक आश्रम, सैकड़ों गुरुकुल और गौशालाएं स्थापित कीं। हर आश्रम में सत्संग, योग शिक्षा, आयुर्वेदिक चिकित्सा और सामाजिक सेवा के कार्य संचालित होते थे। पूज्य बापू जी हर एक सेवा का स्वयं निरीक्षण करते थे।

धर्मान्तरण विरोधी कार्य
पूज्य बापू जी के सामने जो भी ईसाई मिशनरी का धर्मान्तरण का नया पैंतरा आता, उसका वे तोड़ निकालकर उनके धर्मान्तरण के कार्य को लगातार विफल करते रहे। उन्होंने 9 प्रमुख सेवा कार्यों के माध्यम से ईसाई मिशनरीज के हर पैंतरे का जवाब दिया:
- भोजन-भजन-दक्षिणा - भोजन और धन के लालच से धर्मान्तरण रोका
- निशुल्क आयुर्वेदिक दवाई - चिकित्सा के माध्यम से धर्मान्तरण रोका
- गुरुकुल - शिक्षा के माध्यम से धर्मान्तरण रोका
- निशुल्क आवास - आवास के माध्यम से धर्मान्तरण रोका
- रोजगार योजना - रोजगार के माध्यम से धर्मान्तरण रोका
- गौशालाएं - गौ-रक्षा और सनातन संस्कृति की रक्षा
- घर वापसी - लाखों धर्मान्तरित लोगों की वापसी
- एक मंच - सभी संतों को एकजुट किया
- तुलसी पूजन / मातृ-पितृ पूजन - सनातन परम्पराओं को मजबूत किया
वर्तमान स्थिति
पूज्य बापू जी को 31 अगस्त 2013 को षडयंत्रपूर्वक गिरफ्तार किया गया। 13 वर्षों से अधिक जेल में रहने के बाद, 9 जनवरी 2025 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की।
जबसे पूज्य बापू जी जेल में हैं, उनके सभी धर्मान्तरण विरोधी कार्य लगभग बंद हैं। गुप्त ईसाई एजेंटों ने आश्रम के सभी पदों और धन पर कब्जा कर लिया है।
सत्य की लड़ाई जारी है। हिन्दू महासंकल्प सभा के माध्यम से प्रतिदिन सत्य और न्याय के लिए चर्चा होती है।